नमस्ते और स्वागत है आपके पसंदीदा पॉडकास्ट में। पिछले सात दिनों से बांग्लादेश में राजनीतिक अशांति अपने चरम पर है, जहाँ एक छात्र नेता की दुखद मौत के बाद पूरा देश विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की चपेट में आ गया है। आज हम बांग्लादेश की इस बिगड़ती स्थिति, इसके पीछे के कारणों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर विस्तार से बात करेंगे।
यह सब शुरू हुआ छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के साथ। हादी, जो जुलाई 2024 के विद्रोह में एक प्रमुख व्यक्ति थे जिसने शेख हसीना सरकार को गिराया था, अवामी लीग और भारत-समर्थक राजनीति के मुखर आलोचक थे। उन्हें 12 दिसंबर को ढाका में गोली मारी गई थी और 18 या 19 दिसंबर, 2025 को सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मौत की खबर ने पूरे बांग्लादेश में आग लगा दी।
हादी की मौत के तुरंत बाद, ढाका और बांग्लादेश के अन्य हिस्सों में व्यापक विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों ने द डेली स्टार और प्रोथोम आलो जैसे प्रमुख समाचार पत्रों के कार्यालयों पर हमला किया और उनमें आग लगा दी। अवामी लीग के कार्यालयों और पार्टी से जुड़ी संपत्तियों को भी निशाना बनाया गया, जहाँ तोड़फोड़ और आगजनी की गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रदर्शनकारियों ने ढाका में भारतीय राजनयिक मिशनों और राजशाही में भारतीय सहायक उच्चायोग की ओर मार्च करने का प्रयास किया, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इस दौरान भारत-विरोधी नारे लगाए गए और यह आरोप भी लगा कि हादी के हमलावर भारत भाग गए थे। इस अशांति में मैमनसिंह के भालुका उपज़िला में एक और दुखद घटना हुई, जहाँ ईशनिंदा के आरोपों पर भीड़ द्वारा एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और उसे जिंदा जला दिया गया।
इस गंभीर स्थिति के जवाब में, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हादी के लिए एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। यूनुस ने शांति की अपील की है और वादा किया है कि हादी की हत्या में शामिल लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए "ऑपरेशन डेविल हंट" के दूसरे चरण की भी घोषणा की है। इस बीच, बांग्लादेश चुनाव आयोग ने आगामी संसदीय चुनावों से पहले बढ़ती अशांति को देखते हुए अपने शीर्ष अधिकारियों और कार्यालयों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा का अनुरोध किया है। आपको बता दें कि संसदीय चुनाव 12 फरवरी, 2026 को होने वाले हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, भारत ने बांग्लादेश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और भारत-विरोधी बयानबाजी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। भारतीय उच्चायोग ने बांग्लादेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को यात्रा से बचने की सलाह जारी की है, और सुरक्षा स्थिति के कारण राजशाही और खुलना में अपने दो वीजा आवेदन केंद्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। भारत ने हाल की घटनाओं के बारे में कट्टरपंथी तत्वों द्वारा बनाए जा रहे "झूठे आख्यान" को भी सिरे से खारिज कर दिया है। वहीं, चीन ने बांग्लादेश में सुरक्षित, स्थिर और सुचारू चुनावों की कामना की है।
बांग्लादेश इस समय एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ राजनीतिक अस्थिरता और सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। शरीफ उस्मान हादी की मौत ने जुलाई 2024 के विद्रोह के बाद उपजी नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आगामी चुनाव और शांति बनाए रखने की सरकार की कोशिशें ही यह तय करेंगी कि बांग्लादेश इस संकट से कैसे उबर पाता है।
आज के लिए बस इतना ही। अगले एपिसोड में फिर मिलेंगे एक नई खबर और विश्लेषण के साथ। सुनते रहिए।
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